एकलव्य विश्वविद्यालय में डिजिटल युग में संवेदनशील मन विषय पर चिंतन का सशक्त जागरूकता एवं संवाद से भरा एकदिवसीय सेमिनार संपन्न

एकलव्य विश्वविद्यालय में डिजिटल युग में संवेदनशील मन विषय पर चिंतन का सशक्त जागरूकता एवं संवाद से भरा एकदिवसीय सेमिनार संपन्न
सोशल मीडिया का प्रयोग स्वयं के नियंत्रण में हो: एडवोकेट दीपा तिवारी
राहुल गुप्ता दमोह
दमोह- आंतरिक परिवाद समिति (आईसीसी), अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार सुरक्षा संगठन, दमोह एवं समष्टि वेलफेयर फाउंडेशन, सागर के संयुक्त तत्वावधान में “डिजिटल युग में संवेदनशील मन” विषय पर एकदिवसीय सेमिनार का गरिमामय एवं सारगर्भित आयोजन एकलव्य विश्वविद्यालय में किया गया। यह सेमिनार डिजिटल जीवनशैली के बीच मानवीय संवेदनाओं, मानसिक संतुलन एवं सामाजिक उत्तरदायित्व पर केंद्रित रहा। इस सेमिनार हेतु एकलव्य विश्वविद्यालय की कुलाधिपति डॉ.सुधा मलैया एवं प्रतिकूलाधिपति पूजा मलैया और रति मलैया का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ, जिसने पूरे वातावरण को सकारात्मक ऊर्जा एवं वैचारिक गंभीरता से भर दिया।
मुख्य अतिथि कुलगुरु डॉ. पवन जैन ने कार्यक्रम में पधारे सभी अतिथियों का आत्मीय स्वागत करते हुए अपने उद्बोधन में कहा कि डिजिटल युग में मोबाइल का सीमित एवं विवेकपूर्ण उपयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को पुस्तकों से जुड़ने, अध्ययनशील बनने और गहन चिंतन की आदत विकसित करने का प्रेरक संदेश दिया।
कुलसचिव महोदय ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि सोशल मीडिया की आभासी दुनिया से अधिक महत्वपूर्ण वास्तविक जीवन में परिवार से जुड़ाव है। उन्होंने पारिवारिक संवाद को मानसिक स्वास्थ्य की आधारशिला बताया।
समष्टि वेलफेयर फाउंडेशन, सागर की अध्यक्ष एवं सुप्रीम कोर्ट की सीनियर एडवोकेट सुश्री दीपा तिवारी ने विषय को विधिक दृष्टिकोण से विस्तारपूर्वक प्रस्तुत किया। उन्होंने सोशल मीडिया से जुड़े नवीन कानूनी प्रावधानों, अधिकारों एवं दायित्वों की जानकारी छात्र-छात्राओं को दी तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म के सकारात्मक, सुरक्षित एवं जिम्मेदार उपयोग पर विशेष बल दिया।
इसी क्रम में मुख्य वक्ता तनु भाटिया ने “इट्स ओके टू लॉग आउट एंड टॉक योरसेल्फ” विषय पर प्रभावशाली प्रस्तुति देते हुए गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को आत्मसंवाद एवं डिजिटल डिटॉक्स के महत्व से अवगत कराया। उनके द्वारा की गई एक्टिविटी ने युवाओं को गहराई से आत्मचिंतन के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के दौरान सोशल मीडिया के सकारात्मक एवं नकारात्मक प्रभावों पर विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों खुशी राय (बी. फार्मा), अजय प्रजापति (बी. फार्मा), प्रखर गुप्ता (बी. फार्मा), चंचल कुमारी (बीएससी प्रथम वर्ष) एवं मोहिनी अहिरवार (बीएससी प्रथम वर्ष) ने अपने विचार प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम के मुख्य सहयोग कर्ता अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार सुरक्षा संगठन, दमोह के अध्यक्ष मुकेश तिवारी एवं एडवोकेट अजयदीप मिश्रा रहे। अतिथि के रूप में सुश्री निधि दुबे एवं श्रीमती निशि केसरवानी की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया।
कार्यक्रम का कुशल एवं प्रभावशाली संचालन आईसीसी कमेटी की अध्यक्षा डॉ. सुदेश वाला जैन द्वारा किया गया। अंत में छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ. शैलेंद्र द्वारा आभार प्रदर्शन किया गया।
यह सेमिनार न केवल डिजिटल युग की चुनौतियों पर सार्थक संवाद का माध्यम बना, बल्कि युवाओं को संवेदनशील, संतुलित और जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण वैचारिक पहल सिद्ध हुआ।
इस कार्यक्रम में अधिष्ठाता अकादमिक डॉ शमा खानम के साथ डॉ एस एन जहरोलिया, डॉ आशीष जैन, डॉ.सूर्य नारायण गौतम, डॉ अनिल पिंपल्लापुरे, प्रकृति किरण नागर, आयुषी विश्वकर्मा, रणजीत सिंह, महेश सोनी, आस्था कटारिया, आदि प्राध्यापकों के साथ समस्त संकाय के छात्र छात्राओं की उपस्थिति रही।



